मनुष्य एक जानवर है जिसके चार शाखाएं होती है।इनमें से दो शाखाएं चीजों को पकड़ने,लड़ने और लिखने इत्यादि के काम में आती है और दो शाखाएं चलने फिरने भागने, दौड़ने के काम में आती है। अर्थात मनुष्य दोपाया जानवर है; बचपन में जब वह खड़ा होना नहीं जानता मनुष्य भी चौपाया होता है; इस समय अगली शाखाएं भी पृथ्वी पर कीरडने और चलने फिरने में सहायता देती हैं।
• मनुष्य की अन्य जानवरों से तुलना
अन्य जानवरों की भाँति मनुष्य खाता पीता है, देखता है,
सुनता है, स्पर्श करता है, सूंघता है, मल मूत्र त्यागता है और मैथुन करके सन्तान उत्पन्न करता है। जैसे कौवा, कोयल, बकरी, मैना,तोता, कुत्ता, विल्ली, शेर, गीदड, गाय, बैल, चिल्लाते,चहचहाते,चीपते, दाटते और गाते हैं, क्रीय क्रीय वैसा ही मनुष्य भी बोलता गाता और चिल्लाता है।
सब जानवरों की भापाएँ भिन्न भिन्न है। चिडिया अपने बच्चे की आवाज़ पहचानती है और तुरंत समझ जाती है कि वह क्या मांगता है। यरी का यचा अपनी मां की आवाज़ तुरंत पहचान जाता है यदि हम जानवरों की भाषाए न समझें तो यह कहना ठीक नहीं कि वे जानवर कोई भाषा रखते ही नहीं। यदि हम जर्मन भाषा न समझ सके या कोई यूरोपनिवासी किसी कुपढ भारतवासी की बात न समझ सके तो यह कहना कि जर्मन लोग या भारतवासी कोई भाषा नहीं रखते ठीक नहीं है। भाषाएँ भांति भांति की होती हैं; जब एक देश का मनुष्य दूसरे देश की भाषा को नहीं समझ सकता तो किसी मनुष्य के लिये जानवरो की भाषाए समझना तो बहुत ही कठिन है । मनुष्य
जाति ही में बहुत सी जंगली कौमें हैं जिनको हम असभ्य कहते हैं;इन की भाषाएं कुत्ते, गीदड इत्यादि की भाषाओं के तुल्य हैं।
मनुष्य में सोचने विचारने की शक्ति है, गौर से देखने से मालूम होता है कि अन्य जानवरों में भी यह शक्ति थोडी बहुत पाई जाती है। चिम्पानजी, गोरिला, अरॉगऊटॉग इत्यादि वनमानुपो मे, वानर कुत्ता, हाथी इत्यादि जानवरो में तो यह शक्ति अच्छी मात्रा में पाई जाती है। मनुष्य में बुद्धि है तो अन्य जानवरों में भी है। ये सब जानवर अपनी परिस्थित को देख कर उसके अनुसार काम करते हैं ।सत्य तो यह है कि मनुष्य में कोई गुण ऐसा नहीं है कि जो थोडा बहुत अन्य जानवरो मे भी न पाया जाता हो-केवल भेट प्रकार और मात्रा का है। जो गुण एक जानवर मे एक प्रकार का है वही गुण दूसरे जानवर में दूसरे प्रकार का है; किसी जानवर में कोई विशेष गुण कम है किवी में वह अधिक मात्रा में है।
चित्र १👇
मनुष्य के मस्तिष्क की बनावट अन्य जानवरों के मस्तिप्कों की बनावट में अधिक विचित्र है, उसका भार भी कहीं ज़्यादा होता है।*देखो, चित्र ( ६, ७, ८, ९,१०) उसमें सोचने विचारने, पढ़ने लिखने इत्यादि के केन्द्र अन्य जानवरों की अपेक्षा बड़े और उत्तम प्रकार के होते हैं। मनुष्य में अन्य प्राणियों से अधिक बुद्धि होती है; जो काम और जानवर नहीं कर सकते वे काम वह कर सकता है ।अन्य प्राणी किसी विषय पर अपने मन में वादविवाद करके उस विषय को निर्णय नहीं कर सकते, मनुष्य में इस प्रकार की शक्ति खूब है।इस बुद्धि के कारण मनुष्य अन्य प्राणियों पर हावी रहता है अपनी बुद्धि में शेर को, जंगली हाथी को, ह्वेल को उन से कहीं बल-हीन होने पर भी सहज में पकड कर अपने काबू में कर लेता है।
चित्र १, २, ३, ४ को देखने से स्पष्ट होता है कि मनुष्य के शरीर की बनावट अन्य प्राणियों के शरीर की बनावट की तरह है। उसकी चित्तवृत्तियां भी वैसी ही हैं। दूसरे को मारना, पीटना, चीज़ झपट लेना, ग्या जाना, चकमा देना, हमेशा स्त्री या पुरुप की खोज में रहना और मैथुन की इच्छा करना, क्रोद्ध करना । जहाँ मनुष्य में अन्य प्राणियों में बुन्दि अधिक है वहाँ छल और कपट भी अधिक है ।
मनुष्य के मस्तिष्क का भार १३८० माशे
गोरिला " " " " ६०० "
चिम्पानजी " " " " ४५० "
घोड़ा " " " " ६५० "
बैल। " " " " ५०० "
सुअर " " " " १४० "
कुत्ता " " " " ७० "
चित्र २👇


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