चित्र ५ से विदित है कि चिम्पानजी भी चम्मच से खाना, चायपीना सीख सकता है। सर्कस में चिम्पानजी कोट पतलूम पहनना,हैट लगाना, कुर्सी पर बैठना, सिग्रेट पीना, छुरी काटे और चम्मच से भोजन खाना, कम्मोड पर बैठ कर हगना, कपड़े उतार कर पलँग पर सो जाना इत्यादि काम दिखलाता है। बाँदर और रीछ नाचना, पैसा माँगना, खुशामद करना, अपनी स्त्री को प्यार करना, उस पर गुस्सा करना इत्यादि काम सीख जाते हैं। तोता और मैना बहुत से काम मनुष्य की तरह कर सकते हैं। उनमें सीखने, याद रखने और फिर सिखाई हुई बात को दुहराने या देखी हुई बात को कह देने की शक्ति है। बैय्या की बराबर मनुष्य घोंसला बना ही नहीं सकता।शहद की मक्खी की तरह मनुष्य घर नहीं बना सकता। चींटियों की तरह राज्य करना भी उसके लिये कठिन है। लोग कहते हैं कि इन जानवरों में बुद्धि नहीं होती, ये सब काम बिना बुद्धि के ही होते हैं। हमारे पास इस बात को जानने का कोई साधन ही नहीं है।हमारी राय में ये सब काम बुद्धि द्वारा ही होते हैं। अपने आपको और जानवरों से बडा कहने के लिये हम उन जानवरों की बुद्धि का जो कुछ चाहे नाम धर दें। इससे क्या होता है ?
उपरोक्त से हमारा कहने का मतलव यह है कि मनुष्य के जीवन मे जितने भी काम होते हैं वे अन्य जानवरों की तरह ही होते हैं।कोई बात कम है कोई ज्यादा। मनुष्य की दृष्टि इतनी तेज़ नहीं जितनी कि उनाव, चील वा अन्य चिड़ियाओं की; मनुष्य की सुनने की शक्ति उतनी तेज़ नहीं जितनी जंगल में रहनेवाले खरगोश, शेर, बिल्ली, हिरन इत्यादि जानवरों की, मनुष्य की आवाज़ उतनी दूर नहीं पहुँच सकती जितनी शेर की दहाड, उसकी स्पर्श शक्ति भी
शेर, हाथी इत्यादि से कम है। उसकी पाचन-शक्ति भी कम है।जहाँ ये बातें कम हैं, वहाँ दूसरी ओर देखने से मालूम होता है कि उसमें बुद्धि और जानवरों से कहीं अधिक है, उसमें चीज़ों को बनाने,विगाडने, पढ़ने-लिखने की शक्ति है । बुद्धि अधिक है तो उसमें कपट भीअधिक है। अपनी बुद्धि और कपट से वह अन्य जानवरों पर हावी रहता है।
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